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सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार

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Samrat mihir bhoj pratihar सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार परिहार पड़िहार पढ़ीहार राजपूत राजपुताना वीर योद्धा Parihar padhihar padihar Rajput rajputana veer yoddha PNG Logo hd picture By @GSmoothali गंगासिंह मूठली

What is Rest in Peace (#RIP)

ये "रिप-रिप-रिप-रिप" क्या है? आजकल देखने में आया है कि किसी मृतात्मा के प्रति RIP लिखने का "फैशन" चल पड़ा है, ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि कान्वेंटी दुष्प्रचार तथा विदेशियों की नकल के क...

"किताबी ज्ञान"

पंडित जी बुदबुदा रहे थे, - 'प्रीति बड़ी माता की और भाई का बल, ज्योति बड़ी किरणों की और गंगा का जल।' ... यह सुन वहां से गुजर रही बुजुर्ग महिला हंस पड़ी। पंडित जी को उसका हंसना अपमानज...

क्या परशुराम ने किया था धरती को क्षत्रियविहीन ?

यदि परशुराम इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रिय से खाली कर देते तो आज इतने क्षत्रिय कहा से आते। आज भी क्षत्रियों की गणना की जायें तो वे अन्य सभी जातियों से अधिक मिलेंगे क्या परशुराम ने किया था धरती को क्षत्रियविहीन ? यदि परशुरामजी के अवतार धारण करने का समय निर्धारित किया जाये तो उन्होनें भगवान राम से बहुत पहले अवतार धारण किया था। और उस समय कार्तवीर्य के अत्याचारों से प्रजा तंग आ चुकी थी। कार्तवीर्य उस समय अंग आदि 21 बस्तियों का स्वामी था परशुराम ने अवतार धारण करके कार्तवीर्य को मार दिया और इस संघ को जीतकर कश्यप ऋषि को दान में दे दिया। यह अवतारी कार्य पूरा करने के तुरंत बाद ही वे देवलोक सिधार गये। परशुराम के देवलोक चले जाने के बाद उसके अनुयायियों ने एक परम्परा पीठ स्थापित कर ली जिसके अध्यक्ष को परशुराम जी कहा जाने लगा। यह पीठ रामायण काल से महाभारत काल तक चलती रही। इसलिय़े मूल परशूराम नही बल्कि परशूराम पीठ के अध्यक्ष सीतास्वंयंवर के अवसर पर आये थे। नहीं तो विष्णु के दो अवतार इक्ट्ठे कैसे होते क्योंक परशूरामजी को यह पता नही था कि राम का अवतार हो गया है या नही। किंतु जब राम की पर भृगु चिन्ह ...

सोशल मीडिया पर रावण से जुड़े 8 झूठ..!!

जय श्री राम सोशल मीडिया पर रावण से जुड़े 8 झूठ..!! जानिए क्या है सच्चाई..!!     विजयादशमी के दिन ही भगवान श्रीराम ने राक्षसों के राजा रावण का वध किया था..!! रावण दहन का अर्थ है कि.. हम हमा...

जागों रे...रजपूतो जागो...

🏻कृप्या इसें पूरा अवश्य पढ़ें! समय लग सकता हैं पढ़ने में... यह कहाँ की समझारी युद्ध सें पहले हथियार गिराने में... शराब(दारू)औंर माँस(मटन) का सेवन.... .         हमारा समाज बहुत ही पवि...

"राजपूत संगठन"

समाज की जब भी बात होगी संगठन का होना अपरिहार्य होगा। देखना यह है कि, उनका उद्धेश्य क्या है? दर्शन व मार्ग क्या है? सार्थकता क्या है? अथवा चला कौन रहे है? हम केवल सभी का विरोध करन...

स्वयंसेवक के कर्त्तव्य....

किसी भी सामाजिक संस्था और उसके स्वयं सेवको के ध्यान में रखने और उसके पालन करने की कुछ ख़ास महतवपूर्ण बाते। यदि वे इन सब पर खरे है तो निश्चित विजय व आत्मसंतुस्टी के पात्र हों...